Anglican Church of India

Christmas Greetings to All

Believe, Pray & Speak by Faith

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METROPOLITAN

Archbishop Samuel P. Prakash

The Metropolitan of India

PRIMATE, TAC

Most Rev. Shane B. Janzen

Primate Traditional Anglican Communion

 

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बाइबल क्या कहती हैं ?

क्या अपने दुश्मनों से प्यार करना मुमकिन है ? यीशु मसीह ने कहा : “ मैं तुमसे कहता हैं : अपने दुश्मनों से प्यार करते रहो और जो तुम पर जुल्म कर रहे हैं , उनके लिए प्रार्थना करते रहो । इस तरह तुम स्वर्ग में रहनेवाले अपने पिता के बेटे होने का सबूत दो , क्योंकि वह अच्छे और बुरे दोनो । तरह के लोगों पर अपना सुरज चमकाता है और नेक और दुष्ट दोनों पर बारिश बरसाता है । ” — मत्ती 5 : 44 , 45. आपको क्या लगता है , क्या धर्म की वजह से लोगों में प्यार और शांति बढ़ी है या फिर नफरत और हिंसा की चिंगारी भड़की है ? आज बहुत - से लोगों का कहना है कि धर्म ही सारे फसाद की जड़ है , खासकर जब इसे राजनीति में मिलाया जाता है या जब यह , जातिभेद और राष्ट्रवाद को बढ़ावा देता है । मगर जैसे यीश के शब्द दिखाते हैं , जो लोग ' परमेशवर के सच्चे बेटे हैं वे उसी के जैसा प्यार दिखाने की कोशिश करते हैं । यहाँ तक कि वे अपने दुशमनों से भी प्यार करते हैं । परमेश्वर के एक और सेवक ने कहा : “ अगर तेरा दुशमन भूखा हो तो उसे खाना खिला । अगर वह प्यासा है तो उसे पानी । पिला , बुराई से न हारो बल्कि भलाई से बुराई को जीतते रहो । ” ( रोमियों 12 : 20 , 21 ) लेकिन क्या इस दुनिया में , जहाँ हर कहीं फूट पड़ी है , ऐसा प्यार दिखाना मुमकिन है ? सभी यहोवा के साक्षियों का मानना है कि दुश्मनों से प्यार करना मुमकिन है । आइए यीशु और पहली सदी के उसके चेलों की मिसाल पर गौर करें । उन्होंने अपने दुश्मनों से प्यार किया यीशु लोगों को परमेश्वर की सच्चाई सिखा था और बहुत - से लोगों को उसकी बात सुनना अच्छा लगता था । फिर भी , कई लोग ऐसे थे जिन्होंने उसका विरोध किया । उनमें से कुछ ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उन्होंने यीशु की बाते को नहीं सुनी थी या फिर वे यीशु के दुश्मनों के झाँसे में आ गए थे । ( यूहन्ना 7 : 12 , 13 , प्रेषितों 2:36 - 39 ; 3:15 , 17 । इसके बावजूद , यीश सबको जीवन देनेवाला संदेश बांटता रहा , उनको भी जो उसका कड़ा विरोध करते थे । ( मरकुस 12 : 13-34 ) क्यों ? क्योंकि वह जानता था कि कुछ लोग अपने तौर - तरीके बदलेंगे , उसे मसीहा कबूल करेंगे और परमेश्वर के वचन में । दी सच्चाइयों के मुताबिक जीएँगे । — यूहनला 7:1 , 37 - 46;  17 : 17 .

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